Difference between swethambar parampara digambar and therapanth
श्वेताम्बर, दिगम्बर, और तेरापंथ — ये तीनों जैन धर्म की प्रमुख परंपराएँ हैं। संक्षेप में अंतर इस प्रकार है:
1) श्वेताम्बर परंपरा
- साधु-साध्वियाँ श्वेत वस्त्र धारण करते हैं।
- ग्रंथों और आचार में वस्त्र-धारी संयम को मान्यता है।
- साधारणतः प्रतिमा-पूजा, मंदिर-पूजा, और आगम परंपरा का पालन होता है।
- श्वेताम्बर में भी कई उपसम्प्रदाय हैं, जैसे मूर्तिपूजक, स्थानकवासी, तेरापंथ।
2) दिगम्बर परंपरा
- साधु पूर्ण वस्त्र-त्याग रखते हैं।
- दिगम्बर मानते हैं कि सर्वत्याग ही सर्वोच्च संयम है।
- इनके आचार, ग्रंथ-परंपरा, और प्रतिमा-रूप में कुछ विशेष भेद हैं।
- दिगम्बर परंपरा में भी अनेक आचार-शाखाएँ हैं।
3) तेरापंथ
- तेरापंथ श्वेताम्बर परंपरा की एक उपशाखा है।
- इसकी स्थापना आचार्य भिक्षु ने की थी।
- इसमें एक आचार्य, एक मर्यादा, एक विचार पर बल दिया जाता है।
- यह अनुशासन, एकता, और साधना की शुद्धता पर विशेष जोर देता है।
- तेरापंथ में साधु-साध्वियों की संगठन-व्यवस्था बहुत अनुशासित होती है।
मुख्य अंतर संक्षेप में
- श्वेताम्बर: श्वेत वस्त्रधारी साधु, आगम-परंपरा
- दिगम्बर: वस्त्र-त्यागी साधु, कठोर वैराग्य पर बल
- तेरापंथ: श्वेताम्बर के भीतर एक सुधार-आधारित, अनुशासित शाखा
एक सरल बात
- दिगम्बर और श्वेताम्बर जैन धर्म की दो मुख्य परंपराएँ हैं।
- तेरापंथ श्वेताम्बर के भीतर की विशेष परंपरा है।
यदि आप चाहें तो मैं इसका और सरल तुलना-चार्ट भी दे सकता हूँ।