8 karmo ka saral arth
आठ कर्मों का सरल अर्थ:
- ज्ञानावरणीय कर्म — ज्ञान को ढकने वाला कर्म
- दर्शनावरणीय कर्म — सही दर्शन/सम्यक दृष्टि को ढकने वाला कर्म
- वेदनीय कर्म — सुख-दुख का अनुभव कराने वाला कर्म
- मोहनीय कर्म — मोह, राग-द्वेष और भ्रम उत्पन्न करने वाला कर्म
- आयुष्य कर्म — जन्म-आयु को निर्धारित करने वाला कर्म
- नाम कर्म — शरीर, रूप, जाति आदि का निर्धारण करने वाला कर्म
- गोत्र कर्म — उच्च या नीच कुल का प्रभाव देने वाला कर्म
- अंतराय कर्म — दान, लाभ, भोग, उपभोग और वीर्य में बाधा डालने वाला कर्म
सरल रूप में: ये आठ कर्म आत्मा के गुणों को ढकते हैं और जीव को संसार में बांधे रखते हैं।