मन का क्या कार्य है
जैन धर्म के अनुसार मन का मुख्य कार्य विचार करना, संकल्प-विकल्प करना, और कर्म के लिए प्रेरणा देना है।
सरल रूप में:
- मन सोचता है
- इच्छा और कल्पना करता है
- अच्छे या बुरे भाव उत्पन्न करता है
- जीव को कर्म बंध की ओर भी ले जा सकता है, या संयम की ओर भी
जैन दर्शन में मन को अंतःकरण का एक महत्त्वपूर्ण अंग माना गया है। यदि मन शुद्ध हो, तो वह:
- सम्यक् विचार देता है
- आत्मा को धर्म, संयम और ध्यान की ओर ले जाता है
यदि मन अशुद्ध हो, तो वह:
- राग, द्वेष, क्रोध, मान, माया, लोभ बढ़ाता है
- नए कर्मों का बंध कराता है
इसलिए जैन साधना में मन का निग्रह बहुत आवश्यक माना गया है। मन को वश में करके ही ध्यान, स्वाध्याय, और आत्म-शुद्धि की साधना आगे बढ़ती है।