बल से क्या मतलब होता है ?
जैन धर्म में “बल” का सामान्य अर्थ शक्ति, सामर्थ्य, क्षमता या ताकत होता है।
जैन दृष्टि से बल कई प्रकार का माना जा सकता है, जैसे:
- शारीरिक बल — शरीर की ताकत
- मानसिक बल — धैर्य, संयम, स्थिरता
- आत्मिक बल — क्रोध, मान, माया, लोभ पर विजय पाने की शक्ति
- धर्मबल — सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चारित्र से मिलने वाली शक्ति
जैन साधना में सबसे श्रेष्ठ बल आत्मिक बल माना जाता है, क्योंकि वही आत्मा को पाप और कर्मबंधन से बचाने में सहायक होता है।