10 प्राण का अर्थ है?
जैन धर्म में 10 प्राण का अर्थ है जीव के 10 प्रकार के जीवन-गुण या प्राणशक्ति। ये प्राण जीव के अस्तित्व और चैतन्य के आधार माने जाते हैं।
10 प्राण ये हैं:
- स्पर्शेन्द्रिय प्राण — स्पर्श का ज्ञान
- रसनेन्द्रिय प्राण — स्वाद का ज्ञान
- घ्राणेन्द्रिय प्राण — गंध का ज्ञान
- चक्षुरेन्द्रिय प्राण — देखने की शक्ति
- श्रोत्रेन्द्रिय प्राण — सुनने की शक्ति
- मनः प्राण — मन की शक्ति
- वचन प्राण — बोलने की शक्ति
- काय प्राण — शरीर की शक्ति/कायबल
- श्वासोच्छ्वास प्राण — श्वास लेने-छोड़ने की शक्ति
- आयु प्राण — जीवन की अवधि/आयु
सरल अर्थ:
जितने प्राण होते हैं, उतना जीव अधिक विकसित माना जाता है। इन प्राणों की हानि को जैन धर्म में हिंसा माना जाता है।यदि आप चाहें, तो मैं 10 प्राण किस-किस जीव में कितने होते हैं यह भी बता सकता हूँ।