22. घोर बीमारियाँ होने पर भी विचलित न होना कौन सा तप है? A) घोर पराक्रम तप B) घोर तप C) उग्र तप D) दीप्त तप, jainism
यह D) दीप्त तप है।
अर्थ: घोर बीमारियाँ, कष्ट या शरीर की पीड़ा होने पर भी साधक का चित्त विचलित न होना और तप में स्थिर रहना — इसे दीप्त तप कहा जाता है।