IF EVERYTHING HAPPENS DUE TO OUR KARMA OR FOR REASON THEN GIVE ME ITS SHLOK
जैन दर्शन में कर्म के संबंध में यह प्रसिद्ध भावार्थ-श्लोक कहा जाता है:
कर्मणा बध्यते जीवः, कर्मणा मुच्यते पुनः । कर्मणैव हि संसिद्धिः, कर्मणैव विनश्यति ॥
अर्थ: जीव कर्मों से बंधता है, कर्मों से ही मुक्त भी होता है। उत्थान, पतन, सुख-दुःख — सबमें कर्म का ही प्रभाव है।
जैन सिद्धांत के अनुसार, हर घटना का संबंध पूर्वकृत कर्म और वर्तमान निमित्तों से होता है। अतः जीवन में जो भी होता है, उसके पीछे कारण और कर्म दोनों कार्य करते हैं।