full Jain Prakrit upvaas pachchakhkhān in Sanskritized script.
यह रहा पूर्ण जैन प्राकृत उपवास पच्चख्खाण संस्कृतित/देवनागरी लिपि में:
उवस्सयं पच्चक्खामि, नीरसणं पच्चक्खामि, सव्वं पाणाइवायं पच्चक्खामि, सव्वं मुसावायं पच्चक्खामि, सव्वं अदिन्नादाणं पच्चक्खामि, सव्वं मेहुणं पच्चक्खामि, सव्वं परिग्गहं पच्चक्खामि, जावज्जीवाए तिविहेणं, तिहिं करणेहिं, न करेमि, न कारवेमि, मनसा, वयसा, कायसा, अन्नं न खादामि, पानीयं न पिवामि, जाव एक्कं दिवसं, जाव राईदिवसं, जाव सव्वकम्मं पच्चक्खामि।
यदि आप चाहें, तो मैं इसका शुद्ध श्वेताम्बर/दिगम्बर पाठ, सरल हिन्दी अर्थ, या एकदम शुद्ध प्राकृत वर्तनी में भी दे सकता हूँ।