शुद्ध श्वेताम्बर upvaas pachkaan
शुद्ध श्वेताम्बर परंपरा में उपवास का पच्चक्खाण सामान्यतः इस प्रकार लिया जाता है:
पच्चक्खाण: > अज्ज पञ्चहिं अणसणं पच्चक्खामि > जाव नियाणं पारणं न करेमि ताव अणसणं पच्चक्खामि
सरल अर्थ: मैं आज से पारणा तक अन्न-जल का पूर्ण त्याग करता/करती हूँ। अर्थात मैं उपवास का संकल्प लेता/लेती हूँ।
संक्षिप्त शुद्ध रूप
कई जगह इसे ऐसे भी लिया जाता है:> अणसणं पच्चक्खामि > जाव पारणं न करेमि ताव अणसणं पच्चक्खामि
भावार्थ
- अणसणं = उपवास
- पच्चक्खामि = त्याग करता हूँ / व्रत लेता हूँ
- जाव पारणं = जब तक पारणा न हो
- ताव = तब तक
ध्यान रखने योग्य बात
श्वेताम्बर परंपरा में पच्चक्खाण के शब्द गुरु, क्षेत्र, और परंपरा के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकते हैं, लेकिन भाव एक ही रहता है: अन्न-जल का पूर्ण त्याग और तप का संकल्प।अगर चाहें, मैं शुद्ध श्वेताम्बर के लिए “एकासણા, बेआसणा, आयंबिल, उपवास” के अलग-अलग पच्चक्खाण भी दे सकता हूँ।