Pl.give some shloka on sanyam na safalya
ज़रूर। संयम पर एक सुंदर जैन भावयुक्त श्लोक:
संयमो हि परं तपः । अर्थ: संयम ही सबसे बड़ा तप है। यह जैन धर्म में इंद्रियों, मन और वाणी पर नियंत्रण तथा जीव-दया के पालन का महत्त्व बताता है।
एक और भाव:
संयमेन विना धर्मो, न सिद्ध्यति कदाचन । अर्थ: संयम के बिना धर्म की सिद्धि कभी नहीं होती।
यदि आप चाहें, तो मैं संयम, तप, और आत्म-शुद्धि पर 5–10 और जैन श्लोक भी दे सकता हूँ।