संहनन क्या हैँ??
संहनन जैन धर्म में शरीर की हड्डियों की मजबूती, शरीर की बनावट और उसका संघटन कहलाता है। यह जीव के शरीर की एक विशेष शारीरिक संरचना है, जो जन्म के समय उसके कर्मों के अनुसार मिलती है।
संहनन के 6 प्रकार माने गए हैं:
- वज्रऋषभनाराच संहनन — सबसे अधिक मजबूत
- ऋषभनाराच संहनन
- नाराच संहनन
- अर्धनाराच संहनन
- कीलिक संहनन
- सेवर्तिका संहनन — सबसे कमजोर
सरल अर्थ:
- यह बताता है कि किसी जीव का शरीर कितना मजबूत या दुर्बल है।
- यह पुण्य-पाप कर्म के अनुसार मिलता है।
- विशेष रूप से तप, संयम और साधना में इसकी भूमिका मानी जाती है।
यदि आप चाहें, तो मैं संहनन और संस्थान का अंतर भी सरल भाषा में बता सकता हूँ।