Bhaktamber shlok 10 in sanskrit
भक्तामर स्तोत्र का 10वाँ श्लोक संस्कृत में:
कल्याणमन्दिरमिदं हि जिनेन्द्रमूर्तेः
कान्तिं वपुर्दधदिवात्मनि यः श्रियं च ।
आलम्ब्य शान्तिरहितं परमार्थसिद्धिं
प्राप्तोऽसि नाथ तव कीर्तिरिवेह लोकः ॥
यदि आप चाहें, तो मैं इसका शुद्ध अर्थ (अर्थ/भावार्थ) भी दे सकता हूँ।