Jaanana jaanana kise kahete hai
जैन दर्शन में “जानना” का अर्थ है आत्मा के द्वारा वस्तु, भाव, या विषय का बोध होना।
सरल शब्दों में:
- जब आत्मा किसी चीज़ को समझती या अनुभव करती है, उसे जानना कहते हैं।
- यह कार्य ज्ञान कहलाता है।
- आत्मा का मूल स्वभाव जानना और देखना है।
जैन मत में ज्ञान के कुछ प्रमुख रूप माने गए हैं:
- मति ज्ञान — इंद्रियों और मन से होने वाला ज्ञान
- श्रुत ज्ञान — शास्त्र और वाणी से होने वाला ज्ञान
- अवधि ज्ञान — सीमित प्रत्यक्ष ज्ञान
- मनःपर्याय ज्ञान — दूसरों के मन के भावों का ज्ञान
- केवल ज्ञान — पूर्ण और सर्वज्ञ ज्ञान
यदि आप “जानना-जानना” से किसी विशेष जैन शब्द या गाथा/सूत्र का अर्थ पूछ रहे हैं, तो मैं उसका भी सरल अर्थ बता सकता हूँ।