गलत भी हो सकता है
हाँ, मनुष्य से भूल हो सकती है।
जैन धर्म में इसी कारण सम्यक् ज्ञान, सम्यक् दर्शन और सम्यक् चारित्र पर बल दिया गया है, ताकि भ्रम और गलत समझ से बचा जा सके।
सत्य की जाँच, विनम्रता और अनेकांत दृष्टि से विचार करना जैन परंपरा का महत्वपूर्ण भाग है।