ekasna pachkhan karne ki vidhi
एकासना पचक्खण (प्रतिज्ञा) करने की विधि (vidhi) इस प्रकार है:
एकासना पचक्खण की विधि:
- शांत चित्त होकर बैठ जाएँ।
किसी पवित्र स्थान या शांत जगह पर बैठें। कम से कम ध्यानपूर्वक (सामायिक आसन में या पद्मासन) बैठें।
- पंच परमेष्ठी का स्मरण करें।
नमोकार मंत्र या पंच परमेष्ठी का ध्यान करें।
- पचक्खण (प्रतिज्ञा) लें।
पचक्खण के लिए निम्न प्रतिज्ञा बोलें:
संस्कृत/प्राकृत में (सामान्य रूप): _"इहम्हि कालमेहिं, णंमाणुस्सत्ताणं, णंतीयसत्ताणं, णंपरिण्णत्तसत्ताणं, णंममसत्ताणं, णंपवत्तसत्ताणं, णंणिसिअसत्ताणं, णंअनिसिअसत्ताणं, णंभाविज्जसत्ताणं, णंअभाविज्जसत्ताणं, णंएकासणं, णंएकभत्तं, णंएकालं, णंएकसव्वभोजनं, णंएकसव्वपानं, णंएकसव्वरसायं, णंएकसव्वछट्ठं, णंएकसव्वछट्ठपानं, णंएकसव्वछट्ठरसायं, णंएकसव्वछट्ठभोजनं, णंएकसव्वछट्ठभोजनपानरसायं, णंएकासणपचक्खणं समणुप्पवायं।"_
हिंदी में (आसान शब्दों में): _"मैं आज (या जो समय तय किया है) एकासन का पचक्खण करता/करती हूँ। इस समय के दौरान मैं एक ही स्थान पर बैठकर, एक ही बार भोजन करूँगा/करूँगी, और उस समय के बाद भोजन/पेय/रसायन ग्रहण नहीं करूँगा/करूँगी।"_
संक्षिप्त रूप (आम बोलचाल में): _"मैं आज एकासन का पचक्खण करता/करती हूँ। आज मैं एक ही स्थान पर बैठकर एक ही बार भोजन ग्रहण करूँगा/करूँगी, पुनः भोजन/पेय/रसायन ग्रहण नहीं करूँगा/करूँगी।"_
- पचक्खण के बाद नमोकार मंत्र का जाप करें।
- पचक्खण के नियमों का पालन करें:
- एक ही स्थान पर बैठकर भोजन/पेय लें। - एक ही बार में भोजन समाप्त करें। - उसी स्थान पर उठकर पुनः कुछ ग्रहण न करें।
नोट:
- यदि किसी गुरु या साधु-साध्वी के सान्निध्य में हों तो उनके मार्गदर्शन में पचक्खण लें।
- पचक्खण समाप्त होने पर "पारणा" करें अर्थात समाप्ति की घोषणा करें।
संदर्भ:
- 'जैनाचार'
- 'पचक्खण संग्रह'
- 'जैन सामान्य आचार संहिता'
यदि आपको किसी विशेष भाषा या संप्रदाय (श्वेतांबर/दिगंबर) के अनुसार पचक्खण चाहिए, तो कृपया स्पष्ट करें।