Lord Mahaveer food
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भगवान महावीर ने दीक्षा लेने से पहले गृहस्थ जीवन में साधारण शाकाहारी भोजन ग्रहण किया। लेकिन दीक्षा के बाद उन्होंने कठोर तपस्या की और कई वर्षों तक अल्पाहार/उपवास रहे। केवलज्ञान प्राप्त होने के बाद भगवान महावीर ने आहार नहीं किया, क्योंकि सिद्ध और अरिहंत अवस्था में शरीर-निर्वाह की आवश्यकता भिन्न होती है।
संक्षेप में:
- गृहस्थ अवस्था: सामान्य शाकाहारी भोजन
- दीक्षा के बाद: तप, उपवास, अल्पाहार
- केवलज्ञान के बाद: आहार नहीं
जैन धर्म में भगवान महावीर का जीवन अहिंसा, संयम, और तपस्या का सर्वोच्च उदाहरण माना जाता है।