Anguthe ameut base
आपका प्रश्न "अँगूठे अमृत बसे" से संबंधित है। यह वाक्यांश आमतौर पर भारतीय संतों या उपदेशों में सुनने को मिलता है, जिसमें हाथ के अँगूठे में अमृत (अर्थात् कोई विशेष शक्ति या महत्व) होने की बात कही जाती है।
जैन दर्शन के अनुसार, शरीर के किसी विशेष अंग में कोई अलौकिक शक्ति या 'अमृत' का वास नहीं माना जाता। जैन धर्म आत्मा की शुद्धता, अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, और संयम को महत्व देता है। जैन ग्रंथों में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि अँगूठे में अमृत या कोई चमत्कारी शक्ति होती है।
जैन दृष्टि से, मुक्ति और आत्मकल्याण केवल अपने कर्मों के शुद्धिकरण और आत्मसाधना से संभव है, न कि शरीर के किसी भाग में अमृत या चमत्कार की धारणा से।
यदि आपको जैन धर्म से जुड़ा कोई और प्रश्न है, तो कृपया पूछें।