gochri niyam batao
गोचरी के नियम जैन साधु-साध्वी के लिए अहिंसा, संयम और शुद्ध आहार की मर्यादा के अनुसार होते हैं। सामान्य रूप से ये नियम माने जाते हैं:
- विनयपूर्वक और मौन भाव से गोचरी ली जाती है।
- जीवहत्या या हिंसा होने वाला भोजन नहीं लिया जाता।
- रात्रिभोजन नहीं लिया जाता।
- अत्यधिक स्वाद, आसक्ति या चयन नहीं किया जाता।
- ताज़ा, शुद्ध और संयमी आहार ही लिया जाता है।
- एकत्रित या विशेष रूप से पकाया हुआ भोजन भी परंपरा और आचार के अनुसार देखा जाता है।
- दाताओं में आग्रह, लालच, या अपेक्षा नहीं रखी जाती।
- निर्दोष, विधिपूर्वक और समयानुसार गोचरी ग्रहण की जाती है।
- शरीर-रक्षा मात्र के लिए ही आहार लिया जाता है, भोग के लिए नहीं।
- स्थानीय आचार, दिगंबर-श्वेतांबर परंपरा के अनुसार कुछ नियमों में भेद हो सकता है।
संक्षेप में: गोचरी का मूल भाव है — अहिंसा, अपरिग्रह, संयम और विनय।
अगर चाहो, मैं दिगंबर गोचरी नियम और श्वेतांबर गोचरी नियम अलग-अलग भी बता सकता हूँ।