thirthankar ke bav kyu hote h
तीर्थंकर के बाल क्यों होते हैं — इसका उत्तर जैन दृष्टि से यह है:
- तीर्थंकर मानव शरीर में ही जन्म लेते हैं, इसलिए उनके शरीर में सामान्य शारीरिक लक्षण होते हैं, जिनमें बाल भी शामिल हैं।
- तीर्थंकर जन्म से ही अत्यंत पुण्यवान होते हैं, लेकिन वे देहधारी जीव हैं; इसलिए उनका शरीर पूर्णतः साधारण मानव शरीर की व्यवस्था के अनुसार होता है।
- जब वे दीक्षा लेते हैं, तब वे केश-लुंचन करते हैं या कराते हैं; यानी मोक्षमार्ग में प्रवेश के समय केशों का त्याग किया जाता है।
- जैन परंपरा में यह भी माना जाता है कि तीर्थंकर का शरीर विशेष दिव्य लक्षणों वाला होता है, फिर भी वह शरीर ही रहता है; इसलिए बाल होना अस्वाभाविक नहीं है।
संक्षेप में: तीर्थंकर का शरीर मनुष्य-शरीर होता है, इसलिए बाल होते हैं; लेकिन दीक्षा के समय उनका त्याग कर दिया जाता है।