thirthankar konse sehtra me h
जैन मान्यता के अनुसार तीर्थंकर कर्मभूमि क्षेत्रों में प्रकट होते हैं।
- इस अवसर्पिणी काल में तीर्थंकर भरत क्षेत्र और ऐरावत क्षेत्र में होते हैं।
- महाविदेह क्षेत्र में तो सदा तीर्थंकर विद्यमान रहते हैं और वहाँ से भी धर्म-उपदेश होता रहता है।
सरल शब्दों में: तीर्थंकर सभी क्षेत्र में नहीं, बल्कि विशेष कर्मभूमि क्षेत्रों में होते हैं।