केवलज्ञान और केवलदर्शन में अंतर simple bhasa me
सरल भाषा में अंतर:
- केवलदर्शन = शुद्ध जानना/देखना
- केवलज्ञान = पूर्ण और विशेष जानना
आसान उदाहरण:
जैसे आप दूर से किसी वस्तु को पहले बस देखते हैं — यह केवलदर्शन जैसा है। फिर आप उसे पूरी तरह पहचान लेते हैं, समझ लेते हैं — यह केवलज्ञान जैसा है।संक्षेप में:
- केवलदर्शन = शुद्ध दर्शन
- केवलज्ञान = शुद्ध ज्ञान
दोनों केवलज्ञानी आत्मा में एक साथ होते हैं। अंतर बस इतना है कि एक में देखने/जानने का सामान्य पक्ष प्रमुख है, और दूसरे में विस्तृत पूर्ण ज्ञान प्रमुख है।