Shrenik Raja tirthankar naam karm
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हाँ, जैन परंपरा के अनुसार श्रेणिक राजा ने तीर्थंकर-नाम कर्म का बंध किया था।
संक्षेप में:
- श्रेणिक राजा की भावना, भक्ति और धर्म के प्रति श्रद्धा अत्यंत प्रबल थी।
- उनकी भावनाओं के कारण उन्होंने तीर्थंकर पद प्राप्त करने योग्य पुण्य का बंध किया।
- जैन ग्रंथों में उनके भव, कर्म और अगले जन्मों के संदर्भ में यह वर्णन मिलता है कि उनके कर्म-बंधन में विशेष पुण्य था।
लेकिन एक महत्वपूर्ण बात:
- तीर्थंकर-नाम कर्म का बंध केवल बाहरी कार्य से नहीं, बल्कि विशुद्ध भावना, सम्यक् श्रद्धा, और उत्कृष्ट अंतरंग परिणाम से होता है।
- इसलिए श्रेणिक राजा के संदर्भ में जो बताया जाता है, वह उनकी अत्यंत शुभ भावना और विशेष कर्मयोग से जुड़ा है।
यदि आप चाहें तो मैं श्रेणिक राजा का जैन दृष्टि से संक्षिप्त जीव-परिचय भी दे सकता हूँ।