Pratikraman sutra ka choutha
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प्रतिक्रमण (Pratikraman) जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है, जिसमें विभिन्न सूत्रों का पाठ किया जाता है। आमतौर पर प्रतिक्रमण के दौरान कई प्रमुख सूत्रों का पाठ होता है। इन सूत्रों में चौथा सूत्र "Ichchhāmi Khamāsamano" (इच्छामि खमासमणो) होता है, जो क्षमा याचना के भाव से बोला जाता है।
चौथा प्रतिक्रमण सूत्र: इच्छामि खमासमणो।
अर्थ: "मैं क्षमा चाहता/चाहती हूँ।"
यह सूत्र सभी जीवों से अपने जाने-अनजाने में हुए अपराधों के लिए क्षमा माँगने के भाव से बोला जाता है।
यदि आपको सभी प्रतिक्रमण सूत्रों का क्रम या किसी अन्य सूत्र का विवरण चाहिए, तो कृपया बताएं।