अछूत कौन माने जाते हैं
जैन धर्म में अछूत जैसी कोई धार्मिक मान्यता नहीं है। जैन सिद्धांत के अनुसार हर जीव आत्मा है, और सभी आत्माएँ समान रूप से सम्माननीय हैं। जाति, जन्म, स्पर्श या सामाजिक हैसियत के आधार पर किसी को नीचा या अछूत नहीं माना जाता।
जैन धर्म का मूल भाव है:
- अहिंसा
- समता
- करुणा
- सभी जीवों के प्रति सम्मान
इसलिए जैन दृष्टि में किसी भी मनुष्य को अछूत मानना जैन धर्म-सम्मत नहीं है।