99 atichar shwetambar
श्वेताम्बर परंपरा में 99 अतिचार का अर्थ है वे 99 सूक्ष्म दोष/उल्लंघन, जो सम्यक् दर्शन, व्रत, आचार और संयम को दूषित करते हैं। ये अतिचार श्रावक-श्राविका के जीवन में विशेष रूप से समझाए जाते हैं और परंपरा तथा ग्रंथों के अनुसार इनके वर्गीकरण में कुछ भेद मिल सकते हैं।
सरल अर्थ:
- अति + चार = मर्यादा से आगे बढ़ जाना
- यानी व्रत तो लेना, लेकिन उसके पालन में सूक्ष्म त्रुटियाँ करना
भावार्थ:
- अहिंसा में छोटी-सी चूक
- सत्य में हल्की विकृति
- चोरी, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह, और संयम में मर्यादा-भंग
- देव, गुरु, धर्म और साधना के प्रति असावधानी
श्वेताम्बर दृष्टि से महत्व:
- अतिचारों से व्रत का शुद्ध फल कम हो जाता है
- इसलिए केवल व्रत लेना पर्याप्त नहीं, निर्मल पालन भी आवश्यक है
यदि आप चाहें, तो मैं 99 अतिचारों की सूची भी श्वेताम्बर परंपरा के अनुसार क्रमबद्ध रूप में दे सकता हूँ।