Yes give some more doha and shayri on santhara
ज़रूर — संथारा / सल्लेखना पर कुछ श्रद्धापूर्ण दोहे और शायरी प्रस्तुत हैं। इन्हें विनम्र, आध्यात्मिक और अहिंसा-भाव से लिखा गया है।
दोहे
1. श्वासों का जब अंत हो, मन में रहे उजास। संथारा का पावन पथ, दे मोक्ष-मार्ग का आस॥
2. देह छूटी तो क्या हुआ, आत्मा अमर निरंजन। संथारा से साधु जन, करते कर्म-विसर्जन॥
3. भोगों से जब वैर हो, संयम हो जीवन सार। संथारा स्वीकारते, साधक करें भव-पार॥
4. शरीर रहे न रहे सदा, धर्म रहे अविचल। सल्लेखना का भाव हो, तो मन हो निर्मल॥
5. अहिंसा की राह में, अंतिम व्रत महान। संथारा से साधना, पाती शांति अपार॥
6. मृत्यु नहीं है हार यह, साधना का अंतिम रंग। संथारा से आत्मा करे, राग-द्वेष का भंग॥
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शायरी
1. संथारा कोई अंत नहीं, यह संयम की पहचान है, देह से हटकर आत्मा का, यह पवित्र अभियान है।
2. जब मोह का दीप बुझा दिया, तब साधना ने राह दिखाई, संथारा के इस मौन पथ ने, मुक्ति की झलक दिखलाई।
3. न शोर, न डर, न कोई शिकायत, बस समता का गहरा भाव, संथारा है वह साधना, जो दे दे अंतर का ठहराव।
4. जिसने जीवन भर संयम साधा, अंत में भी वही रंग रहा, संथारा के पावन क्षण में, आत्मा का ही संग रहा।
5. देह की सीमा टूट जाए, पर धर्म न कभी टूटे, संथारा की इस साधना में, भव-बंधन सब छूटे।
6. मृत्यु भी जब साधना बने, तब जीवन धन्य हो जाता है, संथारा का शांत प्रकाश, मन को निर्मल कर जाता है।
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छोटी-सी भावपूर्ण पंक्तियाँ
- संथारा, भय नहीं; समभाव की अंतिम साधना है।
- संथारा, देह का त्याग नहीं; आत्मा की शुद्धि का संकल्प है।
- संथारा, वैराग्य का शांत दीप है।
- संथारा, मोक्ष-मार्ग की गंभीर आराधना है।
यदि आप चाहें, तो मैं और गहरे भक्ति-भाव वाले, बहुत छोटे स्टेटस-लाइन, या अधिक काव्यात्मक दोहे भी बना सकता हूँ।