Some more shayri or doha
ज़रूर — यहाँ कुछ Jain Dharma-inspired dohe / shayari हैं:
1. अहिंसा का दीप जलाए, मन में करुणा भर लो। जीव-रक्षा ही धर्म है, यही व्रत सदा धर लो।
2. क्षमा-भाव की हो वाणी, सत्य सदा मुख बोले। अल्प-इच्छा, शांत चित्त से, आत्म-कल्याण खिले।
3. राग-द्वेष को दूर भगाओ, समता-रस अपनाओ। जिनवाणी के पथ पर चलकर, जीवन सफल बनाओ।
4. अंतर में जब दीप जलेगा, मोह-अंधेरा भागेगा। स्वयं को जो जीत लेता, वही सच्चा जागेगा।
5. तीर्थंकर की करुणा से, जीवन पावन हो जाए। संयम, तप, और शुद्ध भाव से, आत्मा उज्ज्वल पाए।
6. लोभ घटे, संतोष बढ़े, यही सच्ची संपदा। जैन पथ पर चलने वाला, पाता परम समाधा।
अगर चाहो, मैं और dohe, भक्ति-शैली shayari, या Gujarati/Hindi Jain lines भी लिख सकता हूँ।