नियोग” का जैन शास्त्रीय अर्थ
जैन शास्त्रीय अर्थ में “नियोग” का सामान्य अर्थ होता है विधि, आदेश, नियोजन, या कर्तव्य-रूप से किसी कार्य में प्रवृत्त होना।
जैन ग्रंथों में यह शब्द प्रायः धर्म-आदेश, गुरु-आज्ञा, या शास्त्रसम्मत नियम के अर्थ में आता है। अर्थात्:
- जो विधि बताई गई हो
- जिस कार्य का नियोजन किया गया हो
- जो धार्मिक कर्तव्य के रूप में स्वीकार किया जाए
संक्षेप में, नियोग = शास्त्र-निर्दिष्ट आदेश / नियोजन / कर्तव्य।
यदि इसे आचरण के संदर्भ में लिया जाए, तो इसका भाव है: “जो धर्मसम्मत रूप से करना उचित हो, वही नियोग है।”