साकार बोध के भेद
जैन दर्शन में साकार बोध का अर्थ है ऐसा ज्ञान जिसमें विषय की विशेषता, रूप, नाम, जाति, गुण आदि का स्पष्ट बोध हो। इसके मुख्य भेद सामान्यतः इस प्रकार बताए जाते हैं:
- सविचार साकार बोध
- जिसमें विषय का विचार, विवेक और भेद स्पष्ट रूप से होता है। - जैसे: “यह जीव है”, “यह पुद्गल है”, “यह श्वेत है” आदि।
- अविचार साकार बोध
- जिसमें वस्तु का प्रत्यक्ष बोध तो होता है, पर गहरा विचार-विश्लेषण नहीं होता। - यह अधिक सरल और तात्कालिक बोध होता है।
यदि आप चाहें, तो मैं साकार बोध और निराकार बोध का अंतर भी जैन दृष्टि से सरल रूप में बता सकता हूँ।