कल्याण मंदिर स्तोत्र स्टोरी
कल्याण मंदिर स्तोत्र की कथा संक्षेप में यह है:
आचार्य सिद्धसेन दिवाकर जी एक शिव मंदिर के पास रुके हुए थे। वहाँ कुछ विद्वान जैन आगम और प्राकृत भाषा का उपहास कर रहे थे। तब आचार्य जी ने संस्कृत में कल्याण मंदिर स्तोत्र की रचना की। कहा जाता है कि स्तोत्र के प्रभाव से मंदिर में स्थित लिंग के भीतर से अवंति पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा प्रकट हुई। यह देखकर राजा विक्रमादित्य भी बहुत प्रभावित हुए। ( jainknowledge.com)
यह स्तोत्र भगवान पार्श्वनाथ की भक्ति में रचा गया एक अत्यंत प्रसिद्ध और चमत्कारिक स्तोत्र माना जाता है। ( jainismknowledge.com)
अगर आप चाहें, मैं इसका सरल हिन्दी अर्थ भी बता सकता हूँ।