दर्शन मोहनीय में बंधमे कितनी प्रकृति किस से बंधती है?
दर्शनमोहनीय कर्म में 3 प्रकृतियाँ मानी जाती हैं:
- मिथ्यात्व मोहनीय
- मिश्र मोहनीय
- सम्यक्त्व मोहनीय
बंध किस से होता है? इनका बंध मुख्यतः मिथ्यात्व भाव, यानी तत्त्वों पर विपरीत श्रद्धा, भ्रम, अज्ञान और सत्य धर्म के प्रति अनास्था से होता है।
संक्षेप में:
- मिथ्यात्व गुणस्थान में मिथ्यात्व का बल अधिक होता है।
- मिश्र गुणस्थान में मिश्र भाव से बंध/उदय का संबंध होता है।
- सम्यक्त्व मोहनीय सम्यक्त्व को ढकने वाला कर्म है, जो श्रद्धा के आवरण से जुड़ा रहता है।
अगर आप चाहें, मैं इसे गुणस्थान के अनुसार बहुत सरल तालिका में भी समझा सकता हूँ।