Gyaan ke prakaar
जैन धर्म के अनुसार ज्ञान (Gyaan) के पाँच प्रमुख प्रकार (Prakaar) होते हैं, जिन्हें पंचज्ञान कहा जाता है। ये इस प्रकार हैं:
- मति ज्ञान (Mati Jnana): यह इन्द्रियों और मन के माध्यम से प्राप्त सामान्य ज्ञान है। जैसे—देखना, सुनना, पढ़ना आदि।
- श्रुत ज्ञान (Shrut Jnana): यह शास्त्रों, ग्रंथों, और उपदेशों के माध्यम से प्राप्त होने वाला ज्ञान है। इसे 'श्रवण' से संबंधित माना जाता है।
- अवधि ज्ञान (Avadhi Jnana): यह सीमित क्षेत्र, समय या वस्तुओं तक सीमित विशेष ज्ञान है, जिसे इन्द्रियों के बिना भी जाना जा सकता है। यह कुछ जीवों को पूर्व जन्म या साधना के फलस्वरूप प्राप्त होता है।
- मन:पर्यय ज्ञान (Manahparyaya Jnana): यह दूसरों के मन के विचार जान लेने का ज्ञान है। यह केवल बहुत उच्च साधकों को प्राप्त होता है।
- केवल ज्ञान (Keval Jnana): यह सर्वज्ञान या पूर्ण ज्ञान है, जिसमें संपूर्ण सत्य का प्रत्यक्ष अनुभव होता है। यह अरिहंतों को प्राप्त होता है।
संक्षेप में, जैन धर्म में ज्ञान के ये पाँच प्रकार माने गए हैं: मति, श्रुत, अवधि, मन:पर्यय, और केवल ज्ञान।