श्रध्दा किसे कहते है आम भाषा में एवं वास्तव में
श्रद्धा शब्द का सामान्य अर्थ है—विश्वास या आस्था। आम भाषा में श्रद्धा का अर्थ है किसी व्यक्ति, वस्तु, धर्म, गुरु या विचार के प्रति सम्मान एवं विश्वास रखना।
जैन धर्म के अनुसार, "श्रद्धा" का वास्तविक अर्थ है—तत्त्वों, धर्म, गुरु, और शास्त्रों में सच्चा विश्वास और सम्यक् दृष्टि (सम्यक् दर्शन) रखना। जैन दर्शन में 'सम्यक् दर्शन' (सही दृष्टिकोण) को मोक्ष मार्ग का प्रथम अंग माना गया है, और इसमें श्रद्धा का प्रमुख स्थान है। जब किसी जीव को तत्त्वों (जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आस्रव, संवर, बंध, निर्जरा, मोक्ष) की सच्ची पहचान और उनमें अटूट विश्वास हो जाता है, तो वही सच्ची श्रद्धा कहलाती है।
इस प्रकार:
- आम भाषा में—श्रद्धा = विश्वास, आस्था।
- जैन धर्म में—श्रद्धा = तत्त्वों, सही मार्ग (सम्यक् दर्शन) एवं गुरु-शास्त्र में अडिग विश्वास।
जैन आगमों में कहा गया है: "सम्यग्दर्शनं श्रद्धा" अर्थात् सम्यक् दर्शन ही (सच्ची) श्रद्धा है।
इसलिए, जैन धर्म में श्रद्धा का अर्थ केवल अंधविश्वास या भावनात्मक लगाव नहीं, बल्कि तत्त्वों को जानकर उनमें दृढ़ विश्वास रखना होता है।