stri shulakdhyan ke kis prakaar pe ruk jaate hai digambar ke anusaar
दिगम्बर मान्यता के अनुसार स्त्री-देह में शुक्लध्यान के पहले दो भेद तक ही साधना मानी जाती है:
- पृथक्त्व-वितर्क-वीचार
- एकत्व-वितर्क-वीचार
इसके बाद के दो भेद —
- सूक्ष्मक्रिया-प्रतिपाती
- व्युपरतक्रियानिवृत्ति
— दिगम्बर परंपरा में केवली/आयोगकेवली अवस्था से जुड़े माने जाते हैं, और स्त्री-देह में इन्हें स्वीकार नहीं किया जाता।
संक्षेप में: स्त्री दिगम्बर मत में शुक्लध्यान के प्रथम दो प्रकार तक ही मानी जाती है।