What is ratri bhojan tyag
Ratri Bhojan Tyag का अर्थ है रात्रि में भोजन का त्याग — यानी सूर्यास्त के बाद और प्रातः सूर्योदय से पहले भोजन न करना।
जैन धर्म में इसका महत्व
- रात्रि में अंधकार होने से सूक्ष्म जीवों की अधिक संभावना रहती है।
- भोजन में या पानी में अनजाने में जीवों की हिंसा हो सकती है।
- जैन धर्म में अहिंसा सर्वोपरि है, इसलिए रात्रि भोजन का त्याग किया जाता है।
इसका पालन क्यों किया जाता है
- अहिंसा की रक्षा के लिए
- संयम बढ़ाने के लिए
- आत्म-शुद्धि और साधना में सहायक होने के लिए
सरल अर्थ
दिन में भोजन करना, रात में नहीं।जैन परंपरा में इसे एक महत्वपूर्ण व्रत और संयम-भावना माना जाता है।