Shashwat sutra konse hai
जैन धर्म में "शाश्वत सूत्र" (Shashwat Sutra) का सीधा उल्लेख प्रमुख आगम ग्रंथों में नहीं मिलता है। "शाश्वत" का अर्थ है—जो सदा, हमेशा के लिए सत्य और अपरिवर्तनीय हों। जैन दर्शन में कुछ शाश्वत (सनातन) सिद्धांतों या सत्यों का उल्लेख मिलता है, जिन्हें शाश्वत सत्य या शाश्वत सिद्धांत कहा जा सकता है। ये मुख्य रूप से निम्नलिखित हैं:
- सात तत्व (Seven Tattvas) – जीव, अजीव, आस्रव, बंध, संवर, निर्जरा, मोक्ष
- नवरत्न (Nine Jewels/Tattvas) – इसमें उपरोक्त सात तत्वों के साथ पुण्य और पाप भी आते हैं।
- त्रिरत्न (Three Jewels) – सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान, सम्यक् चारित्र
ये तत्व और रत्न जैन धर्म के शाश्वत (सनातन) सिद्धांत माने जाते हैं, क्योंकि ये हर काल और हर तीर्थंकर के उपदेश में समान रहते हैं।
यदि आप "शाश्वत सूत्र" से किसी विशेष श्लोक, मंत्र या आगम के सूत्र का संदर्भ पूछ रहे हैं, तो कृपया और स्पष्ट करें, जिससे विस्तृत जानकारी दी जा सके। संक्षेप में, जैन धर्म के शाश्वत सिद्धांत—सात तत्व, नौ तत्त्व, और त्रिरत्न—को ही शाश्वत सूत्र के रूप में समझा जा सकता है।