Aacha rang sutra mein kinka varnan aata hai
"आचारांग सूत्र" (Ācāranga Sūtra) जैन आगमों में सबसे प्रमुख श्वेतांबर आगम ग्रंथों में से एक है। इसमें मुख्य रूप से भगवान महावीर स्वामी के आचार (आचरण), संयम, तपस्या, अहिंसा, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य, और साधु-संयम के नियमों का विस्तार से वर्णन किया गया है।
आचारांग सूत्र में मुख्यतः निम्नलिखित का वर्णन आता है:
- भगवान महावीर के जीवन और तपस्या: उनकी साधना, ध्यान, और अहिंसात्मक जीवन का उल्लेख।
- साधुओं के आचार-विचार: साधु-साध्वियों के लिए आहार, विहार, शयन, वस्त्र, और अन्य आचार-संहिताएँ।
- अहिंसा का व्यापक स्वरूप: सभी जीवों के प्रति दया और अहिंसा का पालन।
- संयम और त्याग: इन्द्रिय संयम, परिग्रह त्याग, और तपस्या के नियम।
- अन्य जीवों का वर्णन: विभिन्न जीवों की योनियों, उनके जीवन के रूपों, और उनके प्रति व्यवहार का निर्देश।
- आहार संहिता: भोजन ग्रहण करने के नियम और निषेध।
सार रूप में, आचारांग सूत्र में जैन साधु-साध्वियों के आचार, संयम, अहिंसा, और त्याग के नियमों का विस्तृत वर्णन है। इसमें रंग (रंग-वर्ण) का प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं है, परंतु साधु के लिए वस्त्र, आहार, और आचरण के संदर्भ में रंग या अन्य भौतिक वस्तुओं की आसक्ति त्यागने की बात अवश्य आती है।
यदि आप विशेष रूप से "रंग" (जैसे वस्त्र या अन्य चीज़ों के रंग) के बारे में पूछ रहे हैं, तो आचारांग सूत्र में साधुओं को साधारण और अल्प रंगीन वस्त्र (या निरवस्त्र स्थिति) रखने का निर्देश है, ताकि वे बाह्य आकर्षणों से दूर रहें।
कृपया स्पष्ट करें कि आप किस संदर्भ में "रंग" का वर्णन पूछ रहे हैं—वस्त्र, आहार या अन्य किसी संदर्भ में—ताकि अधिक सटीक उत्तर दिया जा सके।