कुमारपाल राजा ने अपने जीवन काल के दरम्यान कुल कितने ग्रंथों का आलेखन कराया था
कुमारपाल राजा, जो कि गुजरात के प्रसिद्ध सोलंकी वंश के शासक थे, जैन धर्म के महान संरक्षक माने जाते हैं। उनके शासनकाल (लगभग 1143–1172 ईस्वी) में जैन आचार्यों के मार्गदर्शन में अनेक ग्रंथों की रचना और संकलन हुआ। विशेष रूप से, जैनाचार्य हेमचन्द्राचार्य के संरक्षण में कई महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना हुई।
ऐतिहासिक और जैन ग्रंथों के अनुसार, कुमारपाल ने अपने शासनकाल में लगभग २०० ग्रंथों का आलेखन (रचना/संयोजन) कराया था। इनमें दर्शन, आगम, व्याकरण, कोश, काव्य, गणित, ज्योतिष आदि विषयों के ग्रंथ सम्मिलित हैं। सबसे प्रसिद्ध रचनाओं में हेमचन्द्राचार्य द्वारा रचित "त्रिशष्टिशलाकापुरुषचरित्र", "योगशास्त्र", "अभिधानचिन्तामणि" (संस्कृत कोश), और "सिद्धहेम व्याकरण" प्रमुख हैं।
इस प्रकार, कुमारपाल ने अपने जीवनकाल में लगभग २०० ग्रंथों का आलेखन कराया था।