गौशाले पर तेजोलेश्या किसने छोड़ी थी
तेजोलेश्या छोड़ने की घटना जैन धर्म के इतिहास में बहुत प्रसिद्ध है। यह घटना गौशाला (गौशालक) से संबंधित है, जो भगवान महावीर के समकालीन थे। गौशालक जैन धर्म के छठे तीर्थंकर भगवान महावीर के प्रमुख विरोधी माने जाते हैं।
जैन ग्रंथों के अनुसार, गौशालक ने अपनी जीवन यात्रा के अंत में 'तेजोलेश्या' (तेजस् सम्बन्धी लेश्या) छोड़ी थी। कहा जाता है कि जब उनकी मृत्यु समीप थी, तब उन्होंने अपने शरीर से अत्यंत प्रबल तेजोलेश्या का संचार किया, जिससे उनके शरीर से अग्नि निकलने लगी थी और उन्होंने उसी तेजोलेश्या के प्रभाव से प्राण त्याग दिए।
यह घटना 'भगवती सूत्र' जैसे प्राचीन जैन आगम ग्रंथों में वर्णित है।
सारांश: गौशाला (गौशालक) ने गौशाले में तेजोलेश्या छोड़ी थी।