10 bhavs of lors parshwanath
भगवान पार्श्वनाथ के 10 भव ऐसे बताए जाते हैं — 9 पूर्व भव + अंतिम भव। परंपरागत Jain वर्णनों में उनका क्रम इस प्रकार मिलता है:
- Marubhuti
- हाथी (Elephant)
- सहस्रार स्वर्ग में देव
- किरणवेग विद्यााधर
- अच्युत स्वर्ग में देव
- वज्रनाभ
- नवग्रैवेयक में देव
- कनकबाहु चक्रवर्ती
- प्राणत स्वर्ग में देव
- भगवान पार्श्वनाथ ( jainqq.org)
सरल शब्दों में, Marubhuti से शुरू होकर विभिन्न जन्मों और देव-गति के बाद अंत में भगवान पार्श्वनाथ के रूप में जन्म हुआ। यही उनका प्रसिद्ध दसवां भव माना जाता है। ( jainqq.org)
अगर आप चाहें, मैं इन 10 भवों की छोटी कहानी भी क्रम से लिख सकता हूँ।