Karm moto ke panch parmeshthi mota?
आपका प्रश्न "कर्म मोटे के पांच परमेष्ठी मोटा?" (कर्म मोक्ष के पांच परमेष्ठी कौन?)—यह जैन धर्म से संबंधित है।
जैन धर्म में पंच परमेष्ठी (पाँच परम पूज्य) वे पाँच महान आत्माएँ हैं, जिन्हें अत्यंत श्रद्धा और वंदन किया जाता है। ये हैं:
- Arihant (अरिहंत) – जिन्होंने अपने सभी घातिया कर्मों का नाश कर दिया है और केवलज्ञान प्राप्त कर लिया है।
- Siddha (सिद्ध) – जिन्होंने संपूर्ण कर्मों का नाश कर मोक्ष प्राप्त कर लिया है।
- Acharya (आचार्य) – जैन संघ के प्रमुख धर्मगुरु।
- Upadhyaya (उपाध्याय) – जो आगम का अध्ययन और शिक्षा देते हैं।
- Sadhu (साधु) – साधक, तपस्वी, संयमी मुनि।
इन पाँचों को मिलाकर 'पंच परमेष्ठी' कहते हैं। इन्हें नमस्कार करने के लिए ही जैन धर्म का मूल मंत्र 'णमोकार मंत्र' (Navkar Mantra) बनाया गया है।
सारांश: कर्म मोक्ष (कर्म के बंधन से छुटकारा) प्राप्त करने के लिए पंच परमेष्ठी—अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, और साधु—का मार्गदर्शन और वंदन किया जाता है।