Sadhu ke 3 lakshan
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जैन धर्म के अनुसार, साधु (मुनि) के तीन मुख्य लक्षण या गुण निम्नलिखित हैं:
- सम्यक् दर्शन (Right Faith):
साधु के भीतर जिनवाणी, तत्त्व, और आत्मा में दृढ़ श्रद्धा और विश्वास होना चाहिए। यह सम्यक् दृष्टि कहलाता है।
- सम्यक् ज्ञान (Right Knowledge):
साधु को जैन आगमों, शास्त्रों और तत्त्वज्ञान का सही और सच्चा ज्ञान होना चाहिए।
- सम्यक् चारित्र (Right Conduct):
साधु के आचरण में पंच महाव्रत (अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह) का पूर्ण रूप से पालन और संयम होना चाहिए।
इन तीनों लक्षणों को 'त्रिरत्न' भी कहा जाता है। यही साधु के मुख्य लक्षण हैं, जो उसे मुक्ति (मोक्ष) की ओर ले जाते हैं।