Upadhyay ke 25 gun
जैन धर्म के अनुसार, उपाध्याय (Upadhyay) के 25 गुण (गुणधर्म) बताये गए हैं। उपाध्याय वे साधु होते हैं जो अन्य साधुओं को आगम (शास्त्र) का अध्ययन कराते हैं। उनके 25 गुण इस प्रकार हैं:
- ज्ञाता – आगम को जानने वाला
- दर्शिता – आगम का अर्थ बताने वाला
- वाचक – शास्त्र का पाठ करने वाला
- सन्देह-छेदक – शंका का समाधान करने वाला
- संज्ञापक – वस्तु का सही नाम बताने वाला
- तत्त्वोपदेशक – तत्त्वों का उपदेश देने वाला
- शुद्धोपदेशक – शुद्ध उपदेश देने वाला
- साधक – स्वयं साधना करने वाला
- साधन-प्रेरक – दूसरों को साधना में प्रेरित करने वाला
- संयमी – संयम का पालन करने वाला
- दोष-निर्मूलक – दोषों का निवारण करने वाला
- गुण-सम्पादक – गुणों को बढ़ाने वाला
- विनयी – विनयशील
- विनय-प्रवर्तक – विनय का उपदेश देने वाला
- आचार्य-भक्त – आचार्य का भक्त
- श्रुत-भक्त – शास्त्र का भक्त
- आत्मसंयमी – आत्म-संयम रखने वाला
- परोपकारी – दूसरों का भला चाहने वाला
- क्षमावान् – क्षमा रखने वाला
- धैर्यवान् – धैर्य रखने वाला
- आर्य – श्रेष्ठ आचरण वाला
- सम्यग्दृष्टि – सम्यक् दृष्टि रखने वाला
- शीलवान् – शील का पालन करने वाला
- परिषह-जयी – कष्टों को सहन करने वाला
- धर्म-प्रवर्तक – धर्म का प्रचार करने वाला
ये उपाध्याय के 25 गुण हैं, जिनका पालन करना एक आदर्श उपाध्याय के लिए आवश्यक माना गया है।