Umbartha sthapana ki puri vidhi digambar jain ke anusar
डिगम्बर जैन परम्परा में “उंबरठा स्थापना” का अर्थ स्थान, परिवार और आचार्य-परम्परा के अनुसार थोड़ा बदल सकता है। कई स्थानों पर यह गृह-प्रवेश, मंदिर-प्रवेश, या शुभ आरम्भ के समय उंबरठे/दहलीज़ की मंगल स्थापना से जुड़ा होता है। नीचे एक सामान्य डिगम्बर जैन विधि दी जा रही है:
उंबरठा स्थापना की सामान्य विधि
1) शुद्धि
- स्थान को पहले अच्छे से स्वच्छ करें।
- जल छिड़ककर पवित्रीकरण करें।
- यदि संभव हो तो गोमय, गंगाजल, या शुद्ध जल से शुद्धि करें, जैसा स्थानीय परम्परा में प्रचलित हो।
2) संकल्प
- मन में यह संकल्प करें कि यह कार्य:
3) मंगल द्रव्य तैयार करना
आमतौर पर ये वस्तुएँ रखी जाती हैं:- अक्षत
- हल्दी
- कुमकुम
- पुष्प
- सुपारी
- नारियल
- चावल
- जल
- अगरबत्ती / दीपक
- स्वस्तिक या मंगल चिह्न
4) उंबरठे की स्थापना
- उंबरठा/दहलीज़ को उचित स्थान पर रखें।
- उसके नीचे या पास में मंगल द्रव्य रखें।
- अक्षत, पुष्प और जल से पूजन करें।
- “ॐ ह्रीं अर्हं” या “नमोकार मंत्र” का जप किया जाता है।
5) पूजन
- प्रथम नमस्कार मंत्र पढ़ें।
- फिर भगवान के प्रति श्रद्धा रखते हुए मंगल भावना करें।
- कुछ स्थानों पर शांतिधारा या मंगल पाठ भी किया जाता है।
- यदि आचार्य, साधु या पंडितजी उपस्थित हों, तो उनके निर्देश अनुसार पूजन होता है।
6) स्वस्तिक और मंगल लेखन
- उंबरठे पर या उसके पास स्वस्तिक, श्री, या अर्हं जैसा मंगल चिह्न बनाया जाता है।
- यह शुभता और धर्म-स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।
7) स्थापना के बाद नियम
- उंबरठे के ऊपर पैर रखकर अपवित्र भाव से न चलें।
- घर/स्थान में प्रवेश करते समय विनय और शुद्ध आचरण रखें।
- नए स्थान में पहले भगवान का स्मरण करें।
डिगम्बर दृष्टि से विशेष बात
डिगम्बर जैन परम्परा में किसी भी विधि का मूल उद्देश्य द्रव्य शुद्धि से अधिक भाव शुद्धि है। इसलिए:- हिंसा रहित सामग्री लें
- दिखावे से बचें
- पूजा का भाव सम्यक श्रद्धा वाला हो
- स्थानीय आचार्य/बड़े बुजुर्ग की परम्परा को प्रधान मानें
सरल संक्षिप्त क्रम
- स्थान की सफाई
- जल से शुद्धि
- संकल्प
- उंबरठा रखना/स्थापित करना
- नमोकार मंत्र
- अक्षत-पुष्प से पूजन
- मंगल चिह्न
- शुभ प्रवेश
यदि आप चाहें, तो मैं इसे “मंत्र सहित संपूर्ण विधि” के रूप में भी सरल, क्रमबद्ध रूप में लिख सकता हूँ।