Namothhunam kya hai ?
"Namothhunam" (sometimes spelled "Namo Thunam" or "Namokar Mantra") जैन धर्म का सबसे प्रमुख और पवित्र मंत्र है। इसे "णमोकार मंत्र" या "पंच परमेष्ठी मंत्र" भी कहा जाता है। यह मंत्र जैन धर्म के पांच परम पूज्य—अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, और साधु—को नमस्कार (वंदन) करने के लिए बोला जाता है।
संक्षिप्त रूप में "णमो अरिहंताणं, णमो सिद्धाणं, णमो आयरियाणं, णमो उवज्झायाणं, णमो लोए सव्वसाहूणं"। इस मंत्र का अर्थ है:
- मैं अरिहंतों को नमस्कार करता हूँ,
- मैं सिद्धों को नमस्कार करता हूँ,
- मैं आचार्यों को नमस्कार करता हूँ,
- मैं उपाध्यायों को नमस्कार करता हूँ,
- मैं संसार के सभी साधुओं को नमस्कार करता हूँ।
यह मूल रूप से किसी व्यक्ति, जाति, या नाम को नहीं, बल्कि गुणों को वंदन करने का मंत्र है। जैन धर्म में इसका बहुत बड़ा महत्व है और इसे सुबह-सुबह, पूजा या ध्यान के समय पढ़ा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस मंत्र का जाप करने से आत्मा शुद्ध होती है और पापों से मुक्ति मिलती है।