atma bhi kya dravya mein hilti hai?
Answer
नहीं, आत्मा पुद्गल द्रव्य की तरह नहीं “हिलती”। जैन दर्शन में आत्मा का स्वभाव चेतना है, और उसका स्वभाविक गुण गमन-आगमन नहीं माना जाता। लेकिन कर्मों के बंधन के कारण जीव एक शरीर छोड़कर दूसरे शरीर में जन्म लेता है।Explanation
जैन दृष्टि से:- आत्मा = चैतन्य द्रव्य
- पुद्गल = जड़, मूर्त द्रव्य
- पुद्गल में ही भौतिक गति, कंपन, परिवर्तन जैसे गुण दिखते हैं।
- आत्मा स्वयं चेतन है; वह शरीर में जैसे पदार्थ चलता है वैसे नहीं चलती।
फिर भी, जब जीव के साथ कर्म बंधे होते हैं, तब:
- वह एक योनि से दूसरी योनि में जाता है,
- एक शरीर को छोड़कर दूसरे शरीर में उत्पन्न होता है,
- और अपने कर्मों के अनुसार गति करता है।
इसलिए सही भाव यह है कि आत्मा पदार्थ की तरह नहीं हिलती, लेकिन कर्मों के कारण उसकी अवस्था और गमन बदलता है।
Spiritual Understanding
यह समझना बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे स्पष्ट होता है कि:- आत्मा जड़ नहीं है,
- आत्मा शरीर से अलग है,
- और मुक्ति का मार्ग कर्मों से छूटने में है, न कि केवल शरीर बदलने में।
जैन धर्म में आत्मा की शुद्ध अवस्था में वह अपने ज्ञान, दर्शन, सुख और वीर्य में स्थित रहती है।