Goshale per tejolesya kisne chodi
तेजोलेश्या का संबंध जैन धर्म में मनुष्य के मानसिक भावों (लेश्याओं) से है। जैन धर्म के अनुसार कुल छह प्रकार की लेश्याएँ होती हैं: कृष्ण (काली), नील (नीली), कपोत (कबूतर जैसी), तीव्र (पद्म), पांडुर (पीली) और शुक्ल (सफेद)। इनमें से तेजोलेश्या नाम से कोई विशेष लेश्या का उल्लेख जैन आगमों में नहीं है।
जहाँ तक गोशाला (गौशाला) में किसी ने तेजोलेश्या छोड़ी या नहीं, इसका जैन धर्म के प्रमुख ग्रंथों में कोई उल्लेख नहीं है। यदि आप किसी विशेष कथा, संत, या ऐतिहासिक घटना की बात कर रहे हैं तो कृपया अधिक स्पष्ट करें।
यदि आपके प्रश्न का आशय 'तेज' या 'तेजस' से है, या किसी विशेष संत या घटना से है, तो कृपया विस्तार से बताएं। सारांश: जैन धर्म के अनुसार किसी ने गोशाले पर 'तेजोलेश्या' छोड़ी, इसका कोई प्रामाणिक उल्लेख जैन शास्त्रों में नहीं है।