Jain dharam me mirt inshan ka sradh ketne din ka hota hai
Answer
जैन धर्म में मृत व्यक्ति का “श्राद्ध” वैदिक परंपरा जैसा अनिवार्य धार्मिक कर्मकांड नहीं माना जाता। बहुत-सी जैन परंपराओं में मृत्यु के बाद सरल उत्तरक्रिया या स्मरण-सभा की जाती है, और कुछ स्थानों पर तेरहवीं जैसी सामाजिक परंपरा भी निभाई जाती है। लेकिन यह जैन धर्म का मुख्य, आवश्यक नियम नहीं है।Explanation
जैन धर्म में मुख्य ध्यान आत्मा की शुद्धि, सम्यक दर्शन, और सत्कर्म पर होता है। इसलिए मृतक के लिए:- शोक के बजाय धर्म-भावना रखी जाती है
- पुण्य-स्मरण किया जाता है
- दान, जप, प्रार्थना, और सद्भाव रखा जाता है
- जहाँ परंपरा हो, वहाँ 1, 3, 9, 13 दिन जैसी सामाजिक क्रियाएँ भी हो सकती हैं
लेकिन यह सब समुदाय और परिवार की परंपरा पर निर्भर करता है, न कि जैन धर्म की अनिवार्य विधि पर।
Spiritual Understanding
जैन धर्म सिखाता है कि देह नश्वर है, लेकिन आत्मा अमर है। इसलिए मृत्यु के बाद सबसे महत्वपूर्ण बात है:- आत्मा के लिए शांति और शुभ भावना
- परिवार द्वारा धैर्य और समता
- मृतक के नाम पर अहिंसा, दान और धर्म-आराधना
जैन दृष्टि में दिखावे से अधिक भीतर की श्रद्धा महत्वपूर्ण है।