नीचे दी गई पंक्तियाँ कहाँ से ली गई हैं, अर्थात कौन से भजन, चौबीसा या चालिसा में से ली गई हैं? पंक्ति है, रत्नों की वर्षा नृत्य होती, हँस चुके बस मोती मोती.
Answer
आपकी लिखी पंक्ति
श्री वर्धमान स्तोत्र से मिलती है। यह
चालीसा/चौबीसा नहीं, बल्कि स्तोत्र है। इसमें गर्भ-कल्याणक और जन्म-कल्याणक का वर्णन आता है। (
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Explanation
जो सबसे निकट और प्रामाणिक पंक्ति मिली, वह यह है:
“गर्भ समय के कल्याणक में, प्रतिदिन रत्नों की वर्षा।
जन्म समय के कल्याणक में, सकल लोक में सुख हर्षा।”
यह पंक्ति श्री वर्धमान स्तोत्र में है, और यही आपके बताए हुए भाव से सबसे अधिक मेल खाती है। आपके शब्दों में थोड़ा पाठ-भेद या सुनने/स्मरण का अंतर लग रहा है। (
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Spiritual Understanding
इस स्तोत्र में भगवान महावीर के दिव्य कल्याणकों, अतिशयों और महिमा का भावपूर्ण वर्णन है। रत्नवृष्टि, जन्मोत्सव और लोक-आनंद जैसे वर्णन भक्ति-रस को प्रकट करते हैं। (
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Takeaway
संक्षेप में: यह पंक्ति
श्री वर्धमान स्तोत्र की है। यदि आप चाहें, तो मैं इसी स्तोत्र की संबंधित पूरी गाथा/छंद भी दे सकता हूँ।