रूप अनूपम बुद्धिरा सागर, पूरा पुनवन्ता वंश उजागर. ये कौन से भजन चौबीसिया चालीसिया से हैं?
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Answer
आपकी दी हुई पंक्तियाँ मुझे किसी मानक जैन चौबीसी या चालीसा में शब्दशः नहीं मिलीं। सबसे नज़दीकी मिलान मुझे दौलतरामजी के भजन-संग्रह में “हे जिन तेरो सुजस उजागर” और “आतम रूप अनुपम अद्भुत” जैसे पदों से मिला, लेकिन आपके लिखे हुए शब्द उनसे सीधे मेल नहीं खाते। ( jainqq.org)Explanation
इसलिए अभी मैं इसे किसी एक प्रसिद्ध चौबीसी/चालीसा का निश्चित भजन नहीं बता सकता। संभव है कि यह:- किसी स्थानीय/मौखिक रूप में गाया जाने वाला पद हो,
- शब्दों की सुनाई/लिखाई में थोड़ा अंतर हो,
- या किसी अलग स्तवन/भजन की पंक्ति हो। ( jainqq.org)